सुरक्षा की बातें अक्सर बंद कमरों में होती हैं। पर जब देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी एनएसए (NSA) अजीत डोभाल खुद सामने आकर किसी बड़े मंच पर चेतावनी दें, तो समझ जाना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा रहा है। नई दिल्ली में 16 जुलाई 2026 को हुई पांचवीं बिम्सटेक (BIMSTEC) राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। डोभाल ने बिना किसी लाग-लपेट के साफ कह दिया कि हमारे सामने चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। अब समय सिर्फ कागजी बैठकों का नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर कड़े और ठोस फैसले लेने का है।
यह कोई साधारण बयान नहीं था। यह उस क्षेत्र के लिए एक अलार्म था जहां दुनिया की 22 फीसदी आबादी रहती है। बंगाल की खाड़ी के आस-पास बसे ये सात देश न सिर्फ भौगोलिक रूप से जुड़े हैं, बल्कि इनकी सुरक्षा और समृद्धि भी एक-दूसरे से बंधी हुई है। तो आखिर डोभाल ने ऐसा क्या कहा जिसने सुरक्षा गलियारों में हलचल मचा दी? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है यह पूरी हलचल और क्यों बुलाई गई बैठक
भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में बिम्सटेक देशों के सुरक्षा प्रमुख जुटे। इसमें बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के सुरक्षा अधिकारी और खुफिया प्रमुख शामिल हुए। बैठक की कमान खुद अजीत डोभाल के हाथों में थी।
आप सोच रहे होंगे कि अचानक ऐसी बैठक की क्या जरूरत आन पड़ी? सच यह है कि बंगाल की खाड़ी का इलाका धीरे-धीरे वैश्विक राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। एक तरफ म्यांमार में जारी गृहयुद्ध और अस्थिरता का असर सीधे भारत और थाईलैंड की सीमाओं पर पड़ रहा है। दूसरी तरफ हिंद महासागर में चीन की लगातार बढ़ती जासूसी और युद्धपोतों की आवाजाही ने सबकी नींद उड़ा रखी है। इसके ऊपर से समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर ठगी के बढ़ते गिरोहों ने सिरदर्द अलग से बढ़ा दिया है। डोभाल ने इसी गंभीर हालात की तरफ इशारा करते हुए कहा कि हम एक बेहद मुश्किल वैश्विक माहौल में मिल रहे हैं। दुनिया भर में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच हमें मिलकर काम करना ही होगा।
आंकड़ों का गणित और इसकी असली ताकत
बिम्सटेक कोई छोटा-मोटा समूह नहीं है। डोभाल ने इसके महत्व को समझाने के लिए कुछ बड़े आंकड़े सामने रखे।
- इस समूह में शामिल देशों की कुल आबादी लगभग 1.7 अरब है। यानी दुनिया का हर पांचवां इंसान इसी क्षेत्र में रहता है।
- इन सभी देशों की साझा अर्थव्यवस्था यानी जीडीपी (GDP) लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर (5 लाख करोड़ डॉलर) के करीब पहुंच रही है।
- यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया को जोड़ने वाला सबसे मजबूत पुल है।
भौगोलिक रूप से देखें तो बंगाल की खाड़ी दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। अगर यहां कोई बड़ी अस्थिरता आती है, तो इसका सीधा असर भारत समेत इन सभी सातों देशों की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पड़ेगा। डोभाल का सीधा गणित यही था कि इतनी बड़ी ताकत होने के बावजूद हम अपनी सुरक्षा को लेकर ढीले नहीं पड़ सकते।
समंदर में सुरक्षा के लिए दो बड़े फैसलों पर लगी मुहर
इस बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि यह केवल भाषणों तक सीमित नहीं रही। इसमें दो ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर सहमति बनी जो आने वाले समय में गेम को पूरी तरह बदल सकते हैं।
पहला फैसला है समुद्री मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) के लिए नए दिशा-निर्देशों को अपनाना। बंगाल की खाड़ी में चक्रवात यानी तूफान आना कोई नई बात नहीं है। हर साल यहां भयानक तूफान आते हैं जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। अब तक होता यह था कि जब कोई आपदा आती थी, तो देश आपस में फोन कॉल्स के जरिए तालमेल बिठाते थे जिसमें काफी समय बर्बाद हो जाता था। अब इन नए दिशा-निर्देशों के आने के बाद राहत और बचाव कार्य बिना किसी देरी के बेहद तेज गति से शुरू हो सकेंगे।
दूसरा बड़ा फैसला था समुद्री कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए साझा मार्गदर्शक सिद्धांत। इसे आप आसान शब्दों में कोस्ट गार्ड के लिए एक तरह का 'कोड ऑफ कंडक्ट' कह सकते हैं। समंदर में जब विभिन्न देशों के कोस्ट गार्ड या सुरक्षा बल आमने-सामने आते हैं, तो कई बार गलतफहमी के कारण विवाद हो जाता है। नए नियम आने से समंदर में सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समझ बढ़ेगी और किसी भी तरह के अप्रिय टकराव को टाला जा सकेगा।
साइबर ठगी और तकनीक का नया सिरदर्द
बैठक में केवल पारंपरिक युद्ध या सीमाओं की सुरक्षा पर बात नहीं हुई। अजीत डोभाल ने तकनीक के गलत इस्तेमाल और साइबर खतरों पर भी गहरी चिंता जताई।
आजकल म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया के सीमावर्ती इलाकों में ऑनलाइन स्कैम चलाने वाले बड़े-बड़े सिंडिकेट सक्रिय हैं। ये गिरोह भारतीय और अन्य पड़ोसी देशों के युवाओं को नौकरी का झांसा देकर बुलाते हैं और फिर उनसे जबरन वित्तीय धोखाधड़ी करवाते हैं। इसके अलावा सरकारी वेबसाइटों पर हैकिंग के हमले और संवेदनशील डेटा की चोरी भी तेजी से बढ़ी है। डोभाल ने साफ किया कि जब तक बिम्सटेक देश आपस में खुफिया जानकारी साझा नहीं करेंगे, तब तक इन हाई-टेक अपराधियों को पकड़ना मुमकिन नहीं होगा।
भारत की बड़ी रणनीति और सुरक्षा का नया ढांचा
इस बैठक के जरिए भारत ने अपनी विदेश नीति को एक नया आयाम देने की कोशिश की है। भारत काफी समय से 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First) और 'एक्ट ईस्ट' (Act East) नीतियों पर काम कर रहा है। बिम्सटेक इन दोनों नीतियों के मिलन बिंदु पर खड़ा है।
इसके साथ ही भारत का महासागर (MAHASAGAR) दृष्टिकोण भी इसी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। भारत खुद को इस क्षेत्र में एक 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' यानी सुरक्षा के मुख्य स्तंभ के रूप में देखता है। आपदा के समय सबसे पहले मदद पहुंचाना हो या समुद्री डाकुओं से निपटना, भारतीय नौसेना हमेशा आगे रहती है। डोभाल ने इस बात को फिर से दोहराया कि भारत अपने पड़ोसियों की सुरक्षा और विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
अब आगे क्या करने की जरूरत है
भाषण और नीतियां अपनी जगह बहुत अच्छी हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब इन्हें धरातल पर लागू किया जाए। इस बैठक के बाद अब बिम्सटेक देशों को इन कदमों पर तुरंत काम शुरू कर देना चाहिए।
- खुफिया जानकारी साझा करने का पक्का इंतजाम: साइबर क्राइम और आतंकवाद से लड़ने के लिए देशों के बीच रियल-टाइम डेटा शेयरिंग का एक साझा प्लेटफॉर्म होना जरूरी है। केवल कागजी समझौतों से काम नहीं चलेगा।
- साझा सैन्य अभ्यास बढ़ाना: समंदर में कोस्ट गार्ड और नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए नियमित तौर पर पेट्रोलिंग और साझा अभ्यास आयोजित किए जाने चाहिए।
- म्यांमार संकट का हल खोजना: म्यांमार में चल रही अशांति पूरे क्षेत्र के लिए कैंसर की तरह है। इसके पड़ोसी देशों को मिलकर वहां शांति बहाली के लिए कोई कूटनीतिक रास्ता निकालना ही होगा।
अजीत डोभाल की यह चेतावनी समय पर आया एक ऐसा संकेत है जिसे नजरअंदाज करना बिम्सटेक के किसी भी देश को भारी पड़ सकता है। सुरक्षा के मोर्चे पर ढिलाई बरतने का मतलब है सीधे विनाश को न्योता देना। अब देखना यह है कि ये सातों देश डोभाल के इस फॉर्मूले को कितनी जल्दी जमीन पर उतारते हैं।